बचपन के दिन और उसकी यादें पार्ट 3

क्या दिन हुआ करते थे कंचे (मार्बल्स) गिल्ली डंडा, लूडो सांप सीढ़ी और बिज़नेस ये सारे खेल शायद आजकल के बच्चे इनका महत्व नही जाने इस बात पर फिर कभी चर्चा हॉगी.....बरसात के पानी मे हमारी नावे चला करती थी कागज के हवाई जहाज के हम मालिक हुआ करते थे....मिटी के ढेर मैं हमारी बिल्डिंग हुआ करती थी याद है ना वो ईंटो के साथ पिट्ठू खेलना और 7 पत्थर का सितोलिया 14 जनवरी को पतंगे उड़ा करती थी ....होली के रंगों से भी अजीब याराना था और राखी पर बहनों को कुछ देना एक जिमेदार भाई होने का एहसास दिलाना और रावण यानी दशहरा का मेला उसमें पापा के कंधे पर बैठ के मेले जा कर रावण दहन देखना.... दीवाली से पहले घर की सफाई में ये भरोसा रहता था के कुछ ना कुछ जरूर मिलेगा जो खो गया है दिवाली की मिठाई पटाखे इन सबका अलग अहसान था....26 जनवरी 15 अगस्त लड्डू के लिए अटेंड करना यूनिफॉर्म पूरी साफ प्रेस की हुई क्या क्या दिन थे ..... सबके दिनों को याद दिला रहा हु हर वर्ड पर बहुत कुछ लिख सकता हु पर शायद मजा आने के लिए इनका पार्ट ही अच्छा है...........और भी यादे है जो जारी रहेगी .....to be continued

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