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Showing posts from July, 2020

बचपन के दिन और उसकी यादे पार्ट 4

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बचपन की यादें जब कभी याद आती हैं आँखें नाम कर जाती हैं| वो दिन ऐसे होते हैं जो हर कोई चाहता हैं की लौट के आजायें | दोस्तों वो दिन लौट कर वापिस तो नहीं आ सकते पर कोशिश तो जारी है आपको उससे रूबरू करवाने की.... बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाह कही भी सोयें पर आँख मा के आंचल के बिस्तर पर ही खुलती थी !! क्या दिन थे यार साईकल तक किराए पर ले कर चलाते थे ......कॉमिक्स हुआ करती थी वो भी रेंट पे मिलती थी चाचा चौधरी,नागराज,पिंकी,बबलू,मोटू पतलू ना जाने क्या क्या करेक्टर थे वो भी....उसके बाद जगह ली वीडियो गेम ने वो एक नई क्रांति ले कर आया था हमारे लिए उसमे मारियो,आइस लेंडर, टैंक,रॉड रेस,गलैक्सि,बूमर मैन और कॉण्ट्रा को कौन भूल सकता है ये दुनिया थी ना सबसे हसीन दुनिया थी हम लोगो की जो चाहकर भी नही जा सकती है यादों से .........टायर को लकड़ी से मार कर टायर गुमाना रोटी का पता नही बस दूध की ग्लास काफी थी रिचार्ज के लिए सब कुछ इतना हसीन था के अब ये लगता है के बचपन से निकले क्यो...... सुकून की बात मत कर ऐ मेेरे यार बचपन वाला रविवार अब नहीं आता.... चले आओ कभी टूटी हुई चूड़ी के टुकड़े से, वो बचपन की तरह फिर...

बचपन के दिन और उसकी यादें पार्ट 3

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क्या दिन हुआ करते थे कंचे (मार्बल्स) गिल्ली डंडा, लूडो सांप सीढ़ी और बिज़नेस ये सारे खेल शायद आजकल के बच्चे इनका महत्व नही जाने इस बात पर फिर कभी चर्चा हॉगी.....बरसात के पानी मे हमारी नावे चला करती थी कागज के हवाई जहाज के हम मालिक हुआ करते थे....मिटी के ढेर मैं हमारी बिल्डिंग हुआ करती थी याद है ना वो ईंटो के साथ पिट्ठू खेलना और 7 पत्थर का सितोलिया 14 जनवरी को पतंगे उड़ा करती थी ....होली के रंगों से भी अजीब याराना था और राखी पर बहनों को कुछ देना एक जिमेदार भाई होने का एहसास दिलाना और रावण यानी दशहरा का मेला उसमें पापा के कंधे पर बैठ के मेले जा कर रावण दहन देखना.... दीवाली से पहले घर की सफाई में ये भरोसा रहता था के कुछ ना कुछ जरूर मिलेगा जो खो गया है दिवाली की मिठाई पटाखे इन सबका अलग अहसान था....26 जनवरी 15 अगस्त लड्डू के लिए अटेंड करना यूनिफॉर्म पूरी साफ प्रेस की हुई क्या क्या दिन थे ..... सबके दिनों को याद दिला रहा हु हर वर्ड पर बहुत कुछ लिख सकता हु पर शायद मजा आने के लिए इनका पार्ट ही अच्छा है...........और भी यादे है जो जारी रहेगी .....to be continued

बचपन के दिन और उसकी यादे पार्ट 2

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रविवार का बेसब्री से इंतजार रहता था क्योंकिं हमे वो सब उसी दिन करना था जो हम करना चाहते थे.....जूनियर g शक्तिमान,आर्यमन,कैप्टन व्योम,अलिफ लैला और ना जाने क्या क्या था उस बचपन मे .... भरी दोहपहरी मैं क्रिकेट खेलना शर्त होती थी 1 रुपये की पेप्सी की वो बर्फ के गोले वो मावे की कुल्फी वो 5 रुपये वाली लस्सी और वो भजिया झलेबी रात होने पर लाइट चले जाने पर गली मोहल्लले मैं छुपन छुपाई खेलना....वा वा शानदार दिन का अंत इसी चीज से होता था ....स्कूल जाने पर होमवर्क नही होता था तो उस पीरियड से ही गायब हो जाना और ना जाने क्या क्या....ऐसी ऐसी चीजें थी जिसको हम सही मान लेते थे जैसे आकड़े के दूध और पेंसिल के बुरादे को साथ मैं मिला ने से रबड़ बन जाता है और विद्या माता को किताब के बीच मैं रखने से पास हो जाते है  सनथ जयसूर्या के बैट मैं स्प्रिंग थी सिद्ध ने वो बैट तोड़ा ना जाने किस दुनिया में जीते थे गेम थे चुइंगम आयी थी उस समय बिग बोबल और बूमर उनके साथ पहली बार हमने टैटू देखे थे उनका अलग ही क्रेज था और प्लेइंग क्रिकेट कार्ड और माचिस की डिबिया फाड के उसके छाप का कॉलेक्शन करना कितना काम था हमारे पास बहुत व्...

बचपन के दिन और उसकी यादे

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आज की भागदौड़ डिजिटल जिंदगी मैं हम बहुत कुछ पीछे छोड़ के आ गए है शायद हम तकनीकी के सहारे रिश्तेदारों के करीब तो आ गए है पर करीब आने के साथ बहुत कुछ पीछे छोड़ दिया है.....याद है आप लोगो को वो 90's का जमाना शायद अभी वाली पीढी को नही मालूम होगा पर मैं चाहता हु की हमारे बच्चे जाने के मोबाइल से ज्यादा डिजिटल वर्ल्ड से ज्यादा रोमांचक हमारा बचपन हुआ करता था क्या दिन थे "ना किसी का डर था ना किसी से दुश्मनी ना किसी से बैर" बड़ी बड़ी बातें आती है नही बस इतना पता है साथ मैं अपने दोस्त थे अपना बचपन था त्यौहार भी सबके एक थे ....स्कूल मे 1st टाइम शायद डांट लगा के भेजा होगा लगभग सभी को 8 पीरियड 6 घण्टे और बीच मैं खाने के लिए जो छूटी होती थी उसमें शायद सबका टिफिन एक दूसरे से शेयर होता था....स्कूल से आने के बाद स्कूल बैग को साइड मैं फेंका और हम निकल जाते थे उस रोमांचक दुनिया मे जिसमे केवल हम ही राजा होते थे सब अपने आप मैं ....बैट जिसका वो बलेबाजी करेगा और टीम का कप्तान वो होगा जो बॉल लाएगा वो गेंदबाजी करेगा और गलती से अगर बलेबाज जिसका बल्ला है अगर वो पहली बॉल पे आउट हो गया तो मैच वही खत्म क्या...